सोने का भाव ये 13 factors से होता हैं प्रभावित .

सोना एक चमकदार पीले रंग का धातु एवं तत्व है। ये बहुत ही आकर्षक रंग का होता है। इसको सिक्के बनाने, आभूषण बनाने एवं धन के संग्रह के लिये सदियों से प्रयोग में लाया जा रहा है। इन 13 कारणों से सोने का भाव हमेशा प्रभावित होता है।

1 Gold Production ( सोने का उत्पादन )
2 Supply and Demand ( आपूर्ति और मांग )
3 Government Gold Reserves(सरकारी गोल्ड रिजर्व )
4 Global Movement ( वैश्विक आंदोलन )
5 Jewelry Market
6 Inflation (मुद्रास्फीति)
7 Value of the U.S. Dollar(अमेरिकी डॉलर का मूल्य)
8 Central Bank Instability(केंद्रीय बैंक की अस्थिरता)
9 Geo political factors ( भू राजनीतिक कारक )
10 Protection against volatility (अस्थिरता के खिलाफ सुरक्षा )
11 Monetary policy(मौद्रिक नीति)
12 Quantitative Easing (केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रा की आपूर्ति में नई मुद्रा की शुरुआत )
13 Correlation with other asset classes ( अन्य परिसंपत्ति वर्गों के साथ सहसंबंध )

1 Gold Production ( सोने का उत्पादन से सोने का भाव )

सोने का भाव

ज्यादा तर यही वजह है सोने का भाव को प्रवित करनेका । हर साल दुनिया भर में लगभग 2,500 मीट्रिक टन सोने का उत्पादन क्या जाता है । जबकि खफत अनुमानित 165,000 मीट्रिक टन की है।

अगर कल्पना करे तो दुनिया में तीन-साढ़े तीन ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल भरने वाले सभी सोने की कल्पना करें ये खफत है और इस साल का उत्पादन एक क्यूब का निर्माण करता है जो केवल 16 वर्ग फीट है।

हो सकता है नए उत्पादन कुल आपूर्ति की तुलना में कम लग रहि हैं। जब उत्पादन लागत में वृद्धि होती है, तो खनिक अपने मुनाफे को संरक्षित करने के लिए अधिक पैसे के लिए सोना बेचते हैं,

2 Supply and Demand ( आपूर्ति और मांग से सोने का भाव)

सोने का भाव

ये भलेही अनदेखी पॉइंट है। लेकिन आपूर्ति और मांग का अर्थशास्त्र भौतिक सोने की कीमतों को बिलकुल प्रभावित करता है।

Archaeologists का दावा है के नहीं तो लोग सोने की कम से कम 5,000 वर्षों से सोने का खनन कर रहे हैं। यह धातु की कीमती होने की संभावना हमेशा रहती है। चाहे कैसी भी उतार-चढ़ाव क्यों न हो।

World Gold Council, के मुताबिक 2016 की पहली छमाही के दौरान सोने की मांग 15% बढ़कर 2,335 टन हो गई थी। जिसमें 2009 के बाद से निवेश की मांग अपने उच्चतम स्तर पर 16% बढ़ रही थी ।

पहली छमाही के दौरान सोने की आपूर्ति केवल 1% बढ़ी थी ।बढ़ती मांग और विवश आपूर्ति इस कारण से बदलता है सोने का भाव

3 Government Gold Reserves(सरकारी गोल्ड रिजर्व से सोने का भाव)

सोने का भाव


ज्यादा तर बड़े देशों के केंद्रीय बैंक दोनों मुद्रा और स्वर्ण भंडार रखते हैं। किसे की यूएस फेडरल रिजर्व ऑफ यूएस और भारतीय रिजर्व बैंक ये अपने बैंको में दोनों मुद्रा और स्वर्ण भंडार रखते हैं।

सोने का भाव तब बढ़ जाता है। जब बड़े देशों के केंद्रीय बैंक सोने का भंडार भरना शुरू कर देती है और ज्यादा से ज्यादा सोने की खरीद करनी शुरू करती है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ जाता है। और वही सोने की आपूर्ति कम होने लगती है।

4 Global Movement ( वैश्विक आंदोलन से सोने का भाव)

कोई भी वैश्विक हलचल भारत में सोने का भाव को प्रभावित करती है। भारत को सोने के सबसे बड़े आयातकों में से एक माना जाता है।

वैश्विक कीमतों में मूल्य के कारण आयात की कीमतों में बदलाव होता है, मुद्रा के साथ-साथ और भी वित्तीय उत्पाद किसी भी राजनीतिक उथल-पुथल के कारन गिर सकते हैं।

जब सरकार और बाजार में उनका विश्वास लड़खड़ा जाता है। ऐसे संकट की वस्तु के रूप में उपभोक्ताओं के बीच सोना खरीदने में रुचि बढ़ जाती है।

5 Jewelry Market

सोने का भाव

हम भारतीये सोने के गहने बहुत पसंद करते है। जन्मदिन हो या हो त्यौहार सोने के गहने हमारे घरों में एक विशेष स्थान रखते हैं।

दिवाली जैसे त्योहारों या शादी के मौसम इन दोनों के दौरान,उपभोक्ताऔ की मांग बढ़ने के कारण सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं। सोना सिर्फ गहने की जरूरतों पर ही खत्म नहीं होती है।

ये अलग अलग उपकरणों के निर्माण के लिए जैसे की टेलीविजन, कंप्यूटर, जीपीएस आदि के लिए विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों द्वारा कम मात्रा में इस्तमाल में लाई जाती है।

भारत में सोने का उपयोग गहनों, उपहार देने, धन के साथ-साथ वृद्धि के खिलाफ एक मजबूत बचाव के रूप में इस्तमाल किया जाता है।भारत में सोने की कुल माँग का 12% औद्योगिक माँग है।

6 Inflation (मुद्रास्फीति)

सोने का भाव

अगर हम बात करे सोने के भाव की तो मुद्रा की तुलना में सोना अपने आपको लगभग स्थिर चरित्र में रखता है। इसको मुद्रास्फीति को रोकने के लिए प्रयोग किया जाता है।

इसी वजह से निवेशक मुद्रा के बजाय सोना में निवेश करना पसंद करते हैं। जिससे सोने की मांग बढ़ जाती है अगर मुद्रास्फीति अधिक हो जाए। मुद्रास्फीति अंतर्राष्ट्रीय के साथ ही भारत के लिए सही है।

7 Value of the U.S. Dollar(अमेरिकी डॉलर का मूल्य)

सोने का भाव

अभी भी अमेरिकी डॉलर ही दुनिया का प्रमुख आरक्षित मुद्रा माना जाता है। इसको विभिन्न देशों में अंतरराष्ट्रीय ट्रेडों के लिए प्रमुख मुद्राओं में से एक बनाता है

डॉलर की मजबूती और सोने का भाव इन दोनों में बहुत स्पष्ट उलटा संबंध है। जब सोना मजबूत होता है तब डॉलर कमजोर होता है।

उदाहरण देखे तो 2014 के 1 सितंबर और 10 सितंबर के बीच अमेरिकी डॉलर सूचकांक तक़रीबन 2 अंकों की वृद्धि हुई थी वही सोने का बाजार नरम हो गया था।

8 Central Bank Instability(केंद्रीय बैंक की अस्थिरता)

हर देश के पास केंद्रीय बैंक हैं. वही यूरोपीय सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ जापान स्विस नेशनल बैंक जैसे बैंक शामिल हैं इसमे। बैंक अपनी विफलताएं और आर्थिक नीतियां को एक सुरक्षित आश्रय के रूपमे सोने की खरीद या निवेश करती है।

कुछ लोग या कहे निवेशक सोने को धारण करने की भौतिक और ठोस सुरक्षा मानते है जब जब केंद्रीय बैंक घाटे से गुजर रहे होते हैं। इस वजह से बढ़ी हुई मांग सोने के भाव को और भी ज्यादा बढ़ा देती है

9 Geo political factors ( भू राजनीतिक कारक )

नॉर्मली सोना भू-राजनीतिक उथल-पुथल के समय अच्छा करता है। कोरिया की परमाणु क्षमता पर मौजूदा संकट ने सोने की संभावना को बढ़ावा दिया है।

अगर हम युद्ध की संकट को देखे तो। अधिकांश परिसंपत्ति वर्गों की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं,वही सोने का भाव पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

क्यों की सोने की डिमांड पार्किंग फंड के के अनुसार एक सुरक्षित आश्रय के आधार में ऊपर जाती है।

10 Protection against volatility (अस्थिरता के खिलाफ सुरक्षा )

सोना निवेश या खरीदना लोग अपने आपको अस्थिरता और अनिश्चितता से सुरक्षति करने के लिए चाहते हैं।भारतीय घरों में सोने को एक भौतिक संपत्ति,सुरक्षित आश्रय के नजरोसे देखा जाता है।

अधिकांश निवेशक सोना को घरेलू अर्थव्यवस्था के आकर्षण को रेखांकित करते हुए एक संपत्ति के रूप में रखती है।

11 Monetary policy(मौद्रिक नीति)

सोने का भाव

अगर सोने के भाव पर कोई प्रभाव डालता है तो वो मौद्रिक नीति ही है। जिसको फेडरल रिजर्व के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। ब्याज दरों के कारण सोने का भाव पर बड़ा अशर पड़ता है।

ज्यादा प्रॉफिट की उम्मीद में एक निकट-गारंटीकृत प्रॉफिट छोड़ने को अवसर लागत निवेश कहते है। बॉन्ड और सीडी के पास होल्डिंग,उनके ऐतिहासिक चढ़ाव के साथ ही ब्याज दरों के नाममात्र रिटर्न जो राष्ट्रीय मुद्रास्फीति दर से कम है।

इन सबसे नाममात्र का लाभ तो होता है। परन्तु वास्तविक धन हानि होती है। सोना एक आकर्षक निवेश है अपनी 0% उपज के बावजूद क्योंकि ब्याज-आधारित परिसंपत्तियों को हासिल करने की अवसर लागत बहत काम होती है।

उच्चतर गारंटीड रिटर्न के कारन निवेशकों को सोने की अधिक संभावना दिखती है क्योंकि उधार की दरें बढ़ जाती हैं। अगर फेडरल रिजर्व कमेंट्री चाहे तो सोने के बाजारों को स्थानांतरित कर सकती है।

ये हर छह सप्ताह कमसे कम एक बार जरूर बैठकें करती है। अर्थव्यवस्था की स्थिति और मौद्रिक नीति फ्यूचर पर चर्चा करती है। यदि FOMC कहता है कि दरें स्थिर रखने का काम चल रहा है। सोने का भाव उछाल आता है।

12 Quantitative Easing (केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रा की आपूर्ति में नई मुद्रा की शुरुआत )

केंद्रीय बैंक को मुद्रा आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रतिभूतियों को खरीदने का एक केंद्रीय बैंक रणनीति है। पैसे और वित्तीय संस्थानों को मुसीबत फेडरल रिजर्व की तरह बैंकों को और अधिक धन उधार लेने और पैसे की आपूर्ति बढ़ाने मदत करता है।

कोई भी बड़ी मुद्रा आपूर्ति ब्याज दरों जमीन पर धकेल देती है। जिससे निवेशकों को कम अवसर लागत के कारण सोना खरीदने के लिए उत्तेजित किया जा सकता है।

13 Correlation with other asset classes ( अन्य परिसंपत्ति वर्गों के साथ सहसंबंध )

सोना एक अत्यधिक प्रभावी पोर्टफोलियो डायवर्सिफायर है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार प्रमुख परिसंपत्ति वर्गों के साथ नकारात्मक सहसंबंध के कम होने के कारण होता है।

इसके बावजूद भी सोना मुख्यधारा की संपत्ति वर्गों के साथ सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण संबंध नहीं दिखाता है। कुछ का मानना है। जब इक्विटी तनाव में होती है। एक उलटा संबंध सोने और इक्विटी के बीच विकसित हो सकता है।

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